काँग्रेस विरोधी लहर जिसे लोग मोदी लहर का नाम भी देते है लेकिन मै उसे सत्ता विरोधी लहर ही कहूँगा,लंबे समय तक चलनें वाली सरकारें अरुचि पैदा करती है,बहरहाल दलपत सिंह लंबे अन्तर से चुनाव जीते,इसके पहले भी 1977 और 1989 की लहर में चुनाव जीत चुके थे 2004 का चुनाव अपवाद रहा और 2009 में पार्टी ने उन्हें टिकट नही दी, भाजपा अपनी सरकार के 2 वर्ष पूरे होने का जश्न मना ही रही थी तभी 1 जून को उनका निधन हो गया,इन 2 वर्षो में उनकी ओर से जनता के लिए गिनाई जा सकने वाली कोई उपलब्धि खाते में नही थी,उनके निधन होने पर प्रधानमंत्री महोदय की ओर से ट्वीट आया लेकिन समर्थकों ने तो हद ही कर दी जब अशोक सिंघलजी को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी तसवीर जो 2011 की थी को दलपत सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया और उन्हें आधार बनाते हुए कुछ स्थानीय समाचार पत्रों ने भी उस पिक को प्रमुखता से प्रकाशित किया.
अचानक भाजपा को शहडोल और यहा के लोगो की याद आई,सीएम साहब उनके घर पहुचे और रातोरात लगभग 10 किमी की सड़क सिमेंटेड हो गई,जो मेडिकल कालेज शहडोल 2006 में शिलान्यास होने के बाद ईंट गारा का इंतज़ार कर रहा था अचानक वहा खुदाई का काम दिखावे के लिए ही सही चालू हो गया,आनन फानन में घोषणाओ की झडी चिर परिचित अंदाज़ में "ये दैंगे-वो दैंगे" चालू हो गया,विधानसभा के अनुपूरक बजट में शहडोल के लिए 200 करोड़ पास किए गए,ये मन्त्री वो मन्त्री और इतने प्रकार के मन्त्री घूमने लगे जितने शायद कभी विभागों के नाम भी याद न रहे होंगे.
होने वाली घोषणाओं के पूर्ण होने की बात अभी भविश्य में है लेकिन जनता को लुभाने का निर्लज्ज दौर चल रहा है.लेकिन शिवराज का पिछला रिकार्ड बताता है थोक में होने वाली घोषणाओं में से 10 प्रतिशत भी पूरी हो जाए तो वो अपना ही रिकार्ड तोड़ देंगे.
ज्ञान सिंह जो वर्तमान में मैदान में है उन्होंने 1996 और 98 में जीत हासिल की लेकिन 2004 में उनकी टिकट काट दी गई क्योकि वो एक सांसद के रुप में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति भी दर्ज न करा सके थे,काँग्रेस की ओर से स्व.दलबीर सिंह जी और पूर्व सांसद श्रीमती राजेश नंदिनी सिंह की पुत्री हेमाद्री मैदान में है जिन पर वंशवाद का आरोप लगाया जा रहा है या ये कि उनके पिता ज्ञान सिंह से नही जीत पाये वो क्या जीतेंगी लेकिन ज्ञान सिंह इस शर्त पर लडने को तैयार हुए है कि अगर वो जीते तो उनकी खाली शीट से उनका लडका चुनाव लड़ेगा और उसे मन्त्री बनाया जायेगा, यही आरोप लगाने वाले लोग उनके पीछॆ पीछॆ चिरौरी करते फिर रहे थे कि वो (हेमाद्री) भाजपा से लड़ ले,अहंकार में डूबे मदमश्त नेताओं को ये नही पता की माँ नर्मदा में पिछले बरसो बहुत पानी बह चुका है,जिस जनता को ये पिछले 2 सालों में भूल चुके थे अचानक वही जनता उन्हें शहद में डूबी नजर आने लगीं
ये अफवाहें भी उडाई जा रही है कि भाजपा की बहुमत से 1 शीट कम है और अगर 1 शीट आ गई तो काँग्रेस लीडर आफं अपोजीशन बना लेगी उन्हें ये जानना जरूरी है की बीजेपी पूर्ण बहुमत में है और काँग्रेस की 45 शीटे है जो 46 होंगी और जरूरी संख्या है 55 कुल 547 शीटों का 10 प्रतिशत.
इस उपचुनाव से कोई परिवर्तन नही होने वाला लेकिन समय निकलने पर जनता को भूल जाने वालों के लिए अगर भाजपा हारती है तो ये एक अच्छा सबक होगा और कोई नेता फिर कभी ऐसा नही कर पायेगा,कुल मिलकर ये चुनाव भाजपा के लिए वाटरलू सिद्ध होने वाला है जो उन्हें तुलसी दास का ज्ञान भी देगा कि "दुःख में सुमिरन सब करै सुख में करै न कोय,जो सुख में सुमिरन करे को दुःख काहे को होय"
जिस तरह का उपेच्छित व्यवहार सता पक्ष ने इस क्षेत्र के साथ किया है उसे देख् कर तो ऐसा लगता है कि हर साल उपचुनाव हो इसी बहाने काम तो होंगे..
जो कहते है ज्ञानसिंह आज तक कोई चुनाव नही हारे उन्हें 1984 के चुनाव परिणाम को नही भूलना चाहिये जब भाजपा प्रत्याशी ज्ञान सिंह को स्व.दलबीर सिंह जी ने 53322 वोट से हराया था,हां 1996 और 98 के परिणाम उनके पक्ष में रहे सो इस बार बेटी का बदला भी पूरा होगा,
स्व.दलपत सिंह जी जीते जी जनता का भला न कर सके कम से कम मरने के बाद तो वो काम आए उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि..
अचानक भाजपा को शहडोल और यहा के लोगो की याद आई,सीएम साहब उनके घर पहुचे और रातोरात लगभग 10 किमी की सड़क सिमेंटेड हो गई,जो मेडिकल कालेज शहडोल 2006 में शिलान्यास होने के बाद ईंट गारा का इंतज़ार कर रहा था अचानक वहा खुदाई का काम दिखावे के लिए ही सही चालू हो गया,आनन फानन में घोषणाओ की झडी चिर परिचित अंदाज़ में "ये दैंगे-वो दैंगे" चालू हो गया,विधानसभा के अनुपूरक बजट में शहडोल के लिए 200 करोड़ पास किए गए,ये मन्त्री वो मन्त्री और इतने प्रकार के मन्त्री घूमने लगे जितने शायद कभी विभागों के नाम भी याद न रहे होंगे.
होने वाली घोषणाओं के पूर्ण होने की बात अभी भविश्य में है लेकिन जनता को लुभाने का निर्लज्ज दौर चल रहा है.लेकिन शिवराज का पिछला रिकार्ड बताता है थोक में होने वाली घोषणाओं में से 10 प्रतिशत भी पूरी हो जाए तो वो अपना ही रिकार्ड तोड़ देंगे.
ज्ञान सिंह जो वर्तमान में मैदान में है उन्होंने 1996 और 98 में जीत हासिल की लेकिन 2004 में उनकी टिकट काट दी गई क्योकि वो एक सांसद के रुप में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति भी दर्ज न करा सके थे,काँग्रेस की ओर से स्व.दलबीर सिंह जी और पूर्व सांसद श्रीमती राजेश नंदिनी सिंह की पुत्री हेमाद्री मैदान में है जिन पर वंशवाद का आरोप लगाया जा रहा है या ये कि उनके पिता ज्ञान सिंह से नही जीत पाये वो क्या जीतेंगी लेकिन ज्ञान सिंह इस शर्त पर लडने को तैयार हुए है कि अगर वो जीते तो उनकी खाली शीट से उनका लडका चुनाव लड़ेगा और उसे मन्त्री बनाया जायेगा, यही आरोप लगाने वाले लोग उनके पीछॆ पीछॆ चिरौरी करते फिर रहे थे कि वो (हेमाद्री) भाजपा से लड़ ले,अहंकार में डूबे मदमश्त नेताओं को ये नही पता की माँ नर्मदा में पिछले बरसो बहुत पानी बह चुका है,जिस जनता को ये पिछले 2 सालों में भूल चुके थे अचानक वही जनता उन्हें शहद में डूबी नजर आने लगीं
ये अफवाहें भी उडाई जा रही है कि भाजपा की बहुमत से 1 शीट कम है और अगर 1 शीट आ गई तो काँग्रेस लीडर आफं अपोजीशन बना लेगी उन्हें ये जानना जरूरी है की बीजेपी पूर्ण बहुमत में है और काँग्रेस की 45 शीटे है जो 46 होंगी और जरूरी संख्या है 55 कुल 547 शीटों का 10 प्रतिशत.
इस उपचुनाव से कोई परिवर्तन नही होने वाला लेकिन समय निकलने पर जनता को भूल जाने वालों के लिए अगर भाजपा हारती है तो ये एक अच्छा सबक होगा और कोई नेता फिर कभी ऐसा नही कर पायेगा,कुल मिलकर ये चुनाव भाजपा के लिए वाटरलू सिद्ध होने वाला है जो उन्हें तुलसी दास का ज्ञान भी देगा कि "दुःख में सुमिरन सब करै सुख में करै न कोय,जो सुख में सुमिरन करे को दुःख काहे को होय"
जिस तरह का उपेच्छित व्यवहार सता पक्ष ने इस क्षेत्र के साथ किया है उसे देख् कर तो ऐसा लगता है कि हर साल उपचुनाव हो इसी बहाने काम तो होंगे..
जो कहते है ज्ञानसिंह आज तक कोई चुनाव नही हारे उन्हें 1984 के चुनाव परिणाम को नही भूलना चाहिये जब भाजपा प्रत्याशी ज्ञान सिंह को स्व.दलबीर सिंह जी ने 53322 वोट से हराया था,हां 1996 और 98 के परिणाम उनके पक्ष में रहे सो इस बार बेटी का बदला भी पूरा होगा,
स्व.दलपत सिंह जी जीते जी जनता का भला न कर सके कम से कम मरने के बाद तो वो काम आए उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि..
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