१-ऊंगलिया थिरकती रही अलफाज़ बहकते रहे रफ्ता-रफ्ता,रातो को भी तुम मुझे सताते रहे आहिस्ता-आहिस्ता... २-मुद्दतों बाद भी बस वही तुम्हारी एक बात याद है,की मै चली जाऊँगी तो मुझे तुम भूल जाओगे ..... ३- एक दिन ये आदत तुझे बहुत रूलायेगी,तू जो छोड़ देता है हर किसी को अपना बना कर.... ४- मेरे दिन रात मुश्किल में,सकूँ एक पल नही मुझको,मुहब्बत तरस खा मुझ पर छोड़ जा मुझको... ५- हमे देख कर ऐसे लम्हे महफूज़ कर लो तुम,तुम्हारी याद से देखो,निकलते जां रहे है हम. ६- ना चैन से जीने दिया ना खुदा के ही काबिल छोडा दोस्त,वो ठीक ही कहता था कि तुम बस मेरे ही हो.. ७-शरारत ले के आँखों में वो उसका देखना तौबा,मैं नज़रो पे जमी नज़रे झुकाना भूल जाता हूँ, ८-जमाने के सवालों को मैं हस के टाल दूँ दोस्त,लेकिन नमी आँख की कहती है मुझे तुम याद आते हो.... ९-ना मिलेगा कोई जब उसे मेरी तरह चाहने वाला,बहुत रोयेगा वो उस दिन मुझे दोबारा पाने के लिए. १०-ये मोहब्बत है शौक-ए-बरबादी नही ऐ दोस्त,जो मोहब्बत करते है वो थर्राया नही करते. ११-मोहब्बतो के ये सिलसिले कोई आज के नही है साहिल,ईस तीरगी ने लाखो का चैन लूटा है.. १३-गर फिक्र होती उन्हे मेरे आन्खो के शबनमी मोतियो की तो,ये वस्ल की राते यू करवट बदलते ना गुजरती.. १४-दिल के छालो को जो हवा दी उसकी यादो ने दोस्त,तो क्यू ये दर्द आन्खो से रवा होने लगा.. १५-गर जो पूरी हो जाती उससे मिलने की आरजू,फिर इस दुनिया मे मै कहा और दुनिया कहा. १६-क्या यादो का मौसम बिखर चला है ऐ दिल,देखो तो चले है अब ये सुहाने ख्वाब किस ओर. १७-दर्द यु तो न सिहरता था साँसों में कभी बन के गज़ल ,बस आज आती है याद वही अप्रैल की गर्म रात.. १८-चल दिल अब चल नींद के आगोश में ...गर देर हुई तो सोने न देगी ये अप्रैल की रात..
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