Saturday, 26 May 2012

चाहे कितने ही टुकड़ों में बिखरा ये तन होगा,इस तन पे माँ तिरंगे का कफन होगा..

बात 1984 की है ,युवा मन और राजीव की शख़्शियत 21 वी शताब्दी के सपने और सपनो की उड़ान..दुनिया ने हमेशा नई सोच का उपहास उड़ाया है सो उनके लिए भी व्यंगो का खूब इस्तेमाल हुआ फिर भी वो न रुका ना डरा और बढता गया,18 साल के नौजवानों को मत देने का अधिकार,जैसे कोई ये कह रहा हो कि "ऐ नौजवान लो चुनो अपने मन की सरकार" आज जिस पंचायती राज और ग्राम सभाओं की बात हो रही है वो बिल उस दौर में पास कर पाना उनके ही बस में था.मिखाइल गोर्बाचोव जिनके निजी मित्र हो चुके थे और चाइना के देंग जिनकी हस्ती किसी पहचान की मोहताज नही ने प्रोटोकाल की परवाह ना करते हुए उनकी अगवानी में कहा था कि "आओ मेरे नौजवान मित्र चीन की धरती में तुम्हारा स्वागत है" उनकी शख़्शियत ही कुछ ऐसी थी की वो भारत ही नही विश्वं के मंच पर वैश्विक नेता के रुप में स्थापित होते जां रहे थे.बोफोर्स का भूत और चुनाव बाद गायब..एक नए राजीव का उदय हो रहा था कि 21 में 1991 की वो मनहूस शाम आज भी नही भूलती वो तूफान और बारिश,हम क्रिकेट खेल कर लौट रहे थे साथ में हमारी टीम ऐसा लग रहा था का कि कोई बड़ा परिवर्तन होने वाला है,संचार का एकमात्र साधन दूरदर्शन सुबह पता चला कि "एक मानव बम" ने उनकी जान ले ली..आज संचार क्रांति के युग में हम उनके सपनो का भारत बनते हुए देख् रहे है,ईश्वर ने उन्हें प्रिय मानते हुए अपने पास बुला लिया.उनके शहीद दिवस पर इतना ही कहूँगा कि शायद वी.पी.सिंह सरकार ने उनसे जेड प्लस सुरक्षा ना छीनी होती तो शायद वे बच सकते थे..उनको शहीद हुए आज 21 वर्ष हो गए और 21 मई उनके हत्यारों की फाँसी की सजा पर रोक लगाने वालों को आईना दिखा रही है कि आतंकवाद का कोई मजहब नही होता....उनके शहीद दिवस पर उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि....भारत माता की जय

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