- हमने सोचा न था के दिल यू भी घबरायेगा रातों में,कशिश होगी दिल में और कुछ कह भी न पायेगा, वो दिन भी मुहब्बत के याद आयेंगे फिर से,साँस रुकेगी भी नब्ज चलेगी भी, आँखों में सुर्ख धारिया मय की सी बिखरेगी हरसू,पलक मचलेगी यू ही बेखबर आँखें छलकेगी भी, बहकेंगे कदम चलने को उसकी गली फिर से,अक़्ल समझायेगी यू ही दिल मानेगा भी नही, अब तो ये उम्र गुजरेगी कुछ इस तरह से "मस्ताना", चराग-ए-दिल जलायेगा यू ही ढलती रातों को रोयेगा भी..
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