1-आज तुम मुझको यू ही निगाहों से गिरा दो लेकिन,,ये जो दीवानगी के लम्हे हैं याद आयेंगे बहुत,, 2- वैसे तो कोई लफ्ज ना थे जुबा पे दिल के अशआर लिए,,आती गई तेरी याद जैसे कोई अश्क़ो का तूफान लिए,,3- जब भी कोई कड़वी बात याद आती है,एक तल्ख सुबह जब आकर जगाती है,,वैसे तो मयकशी की आदत नहीं,,पर आँख में उतरी खुमारी,दिल के छालों तक आती है,,4- मै यू ही नहीं कहता के रातों को नींद नहीं आती दोस्त,,,वो आने को जो कह गया होता तो फिर बात और ,,5- -तडफती है कोई आह किसी सितमगर के लिए,,निकलती है ग़ज़ल दिल से कोई राह लिए,,6-ये सच है कि ग़ालिब सा कलाम अब कहाँ,,पर मयकशी के मारे हम भी कम नहीं,,.7- शाम के चिरागो ने खूब समझाया,,रात ने भी कितना बहलाया,,ये धड़कनों के गीत बज़ते रहे,,ये उंगलिया यू ही थिरकती रही,,8- कुछ भी कहूँ अल्फाज़ो में मेरे बस वो ही चली आती है,,कौन कहता है कि शाम मेरी गमो में डूबी आती है,,9-ये मयकशी के किस्से कुछ और हसीन होते जाना,,तुम जो साथ होती तो मय से क्या गरज थी,,10-जब मै कभी ख़ुद को ये समझाऊ के तू मेरा नहीं,,मुझ में कोई चीख उठा है,नहीं ऐसा नहीं,,
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